Posts

केराप री राजनीति

जंग लड़ी 2 चुनाव जीते 1 हारे उसके बाद अपने विस्वास पात्र लोगो पर दांव लाग्या  @हेमा राम ढ़ाका पूर्व सरपंच केराप आप 1 सीमेंट के डीलर है आपने सबसे पहला चुनाव लड़ा और बहुत ही घमासान आपने पहला चुनाव अपने बहादुर सिंह राठौड़ के सामने 4 वोट से जीत दर्ज की जब सामान्य सीट थी उसके बाद जब दूसरा चुनाव आपने लड़ा तो आपने मास्टर पुरखा राम जी ढ़ाका के सामने जीत दर्ज की जब obc की सीट थी लेकिन जब आप हैट्रिक लगाने के मुंड में थे उस समय आपके सामने दलीप ढाका ने आपको 345 वोट से हरा दिया आप सरल स्वभाव और मिलनसार यक्ति है और आपमे जब आपका दो चुनाव जीतने के बाद जो चर्चा चलती उसमे आपको राजनीतिक चाणक्य कहाँ जाता था और आज भी आप जहाँ अपना दाँव लगता है वहाँ लगते है आप मूल कांग्रेस के कार्यकता है और आप हर चुनाव में कांग्रेश पार्टी के लिये दम खम लगते है रामु जी ढाका - आपके बड़े भाई और केराप बैंक में काफी टाइम तक सेवा देते रहे और अब रिटायर होकर हो सकता आपकी राजनीति में सक्रिय भूमिका में इस बार नजर आए निवेदक आपके वोटर आपकी जनता

अगरोट के खोखे

अगरोट के खोखे... "खोखा" को जानने के लिए मारवाड़ी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है वरना वो यही समझेंगे की मैं "खो-खो" खेल के बारे में बात कर रहा हूँ। राजस्थान में रहकर अगर किसी ने "खोखा" नही खाया तो समझलो कि उसने अब तक झक मारी है। वैसे राजस्थानी भाषा में "खोखा खाने"  का मतलब भी झक मारना ही होता है लेकिन मैं नही मानता इस मुहावरे को! बल्कि मैं तो ये कहूँगा की खोखा और सूखे बोर (झड़का के) ये मारवाड़ के "ड्राई फ्रूट्स" है। आज भी जब राजस्थान आता हुँ  तो "सालासर" से ये दो ड्राई फ्रूट्स लाना नही भूलता। काजू,बादाम, अखरोट,पिस्ता झक मारते हैं अगर किसी ने बचपन में ये खाये हो तो।  मैं ये भी जानता हूं कि आजकल की जनरेशन सबके सामने खोखे खाना अपनी शान के खिलाफ मानते हैं लेकिन छुप छुपकर जरूर खाते हैं। खोखा और वो भी "अगरोट" के!  वाह वाह... क्या स्वाद है ..। खोखो का भी मौसम होता हैं एक महीने तक का! और जो खेजड़ी पर खुद पक कर सूखते है वो ही ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं। इसमें भी ध्यान रखना पड़ता कि वो भैरूजी के खेजड़े के तो नही है? वरना उल्टी होने ...